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कुत्ता आदमी(लघु कथा)

Posted On: 9 Sep, 2012 Others में

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बेटे की वार्षिक परीक्षाएं निकट थीं. परीक्षाओं की चिंता बेटे की अपेक्षा पिता को अधिक थी. शायद वो अपने बेटे की योग्यता से परिचित थे. इसी कारण यहाँ – वहां जान पहचान भिड़ाने में लगे थे के परीक्षा में बेटे की कुछ मदद हो जाये, मदद नक़ल में. उनके इस प्रयास को तब सफलता मिली जब उन्हें परीक्षा केंद्र के अधीक्षक के बारे में पता चला. लेकिन सुनने में ये भी मिला के अधीक्षक महोदय बड़े कठोर स्वभाव के हैं. लेकिन पिता को अपने जोड़-तोड़ पर पूरा भरोसा था. इसी जोड़-तोड़ के कारण वो अधीक्षक महोदय के निकट के परिचित तक भी पहुँच गए. संध्या के समय पिता और पुत्र दोनों उन परिचित के घर पहुंचे और परीक्षा में बेटे की मदद यानि के नक़ल करवाने के लिए केंद्र अधीक्षक से बात करने को कहा. पिता ने परिचित को ऐसा करने पर चाय-पानी की व्यवस्था करने को भी कहा. लेकिन परिचित ने बड़े ही उदास मन से कहा के आप के बेटे की परीक्षा यदि मेरे केंद्र पर होती तो कोई चिंता नहीं थी. लेकिन जिस केंद्र पर इसकी परीक्षा है वहां का अधीक्षक बड़ा ही गन्दा आदमी है. न तो नक़ल करने देता है ना ही करवाने देता है. चाय तो दूर किसी का पानी भी नहीं पिता. बड़ा कुत्ता आदमी है. पिता ने उदासी से सर हिलाया और बाहर का रुख किया. बेटे ने जीवन की पाठशाला में एक सबक सीख लिया था के ईमानदार आदमी गंदा और कुत्ता होता है.

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18 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Mohinder Kumar के द्वारा
September 10, 2012

रविन्दर जी, उसने शायद गलती से सही सबक सीख लिया… क्योंकि वफ़ादारी में कुते से बढ कर कोई नहीं… जो अपने दायित्व के प्रति सजग और निवार्ह में पूर्ण हैं वही सही मायने में आदमी कहलाने के लायक हैं.. चाहे अपनी गिरी हुई मंशा को पूर्ण करवाने वाले लोग उन्हें कुत्ता कहें. लिखते रहिये.

    Ravinder kumar के द्वारा
    October 7, 2012

    मोहिन्द्र जी, नमस्कार प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्. अपना सहयोग बनाये रखियेगा . नमस्ते जी.

nishamittal के द्वारा
September 15, 2012

रविन्द्र जी आपके इस ब्लॉग पर प्रतिक्रिया दी थी कहीं स्पेम में तो नहीं.सकारात्मक सन्देश आपकी लघु कथा के माध्यम से

    Ravinder kumar के द्वारा
    October 7, 2012

    आदरणीया निशा जी, नमस्कार प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्. नमस्ते जी.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
September 29, 2012

वहां का अधीक्षक बड़ा ही गन्दा आदमी है. न तो नक़ल करने देता है ना ही करवाने देता है. चाय तो दूर किसी का पानी भी नहीं पीता . बड़ा कुत्ता आदमी है. रवीन्द्र जी बहुत ही सटीक, जमाने के अनुसार और सत्य बात कही आप ने आप का आभार ..हम भी ऐसे ही है यही भोग रहे हैं देख रहे हैं जमाने के साथ भले भी उलटे फिर भी चले जा रहे है आज ईमानदार आदमी को सब लुच्चे मिल के यही संज्ञा दे रहे हैं उन्हें घुट घुट कर जीने को मजबूर किये हैं .. हम तो दुआ करेंगे प्रभु ऐसे लोगों को और पैदा करे दुनिया में भरे चाहे कुत्ते ही कहे जाएँ कुछ तो सुधारे यानी कि, पानी भी नहीं पीता ….. जय श्री राधे भ्रमर ५

    Ravinder kumar के द्वारा
    October 7, 2012

    भ्रमर जी, नमस्कार प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्. नमस्ते जी.

jlsingh के द्वारा
October 1, 2012

priy rawindra kumar jee, bahut hee sundar sandesh parak laghukatha padhkar man gadgad ho gaya …. बेटे ने जीवन की पाठशाला में एक सबक सीख लिया था के ईमानदार आदमी गंदा और कुत्ता होता है.

    Ravinder kumar के द्वारा
    October 7, 2012

    सिंह साहब , नमस्कार प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्. सहयोग बनाये रखियेगा . नमस्ते जी.

Ravinder kumar के द्वारा
October 7, 2012

मोहिन्द्र जी, नमस्कार प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्. नमस्ते जी.

seemakanwal के द्वारा
October 10, 2012

कितने दुःख की बात है की बड़े -बुजुर्गों के द्वारा बच्चों में गलत सन्देश जाता है . मार्मिक कथा ,

    Ravinder kumar के द्वारा
    October 10, 2012

    सीमा जी, नमस्कार. बड़ों से ही संस्कार और कुसंस्कार बालकों में जाते हैं. अगर बड़े सुधर जाएँ तो भ्रष्टाचार अगली पीढ़ी तक नहीं जा पायेगा. प्रोत्साहन के लिए आपका धन्यवाद्. आते रहिएगा. नमस्ते जी.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
October 11, 2012

आदरणीय रविन्द्र जी, सादर अभिवादन आज के ज़माने का सच . बधाई, कथा हेतु.

    Ravinder kumar के द्वारा
    October 11, 2012

    आदरणीय प्रदीप जी, सादर नमस्कार. जीवन मूल्य बदल गए हैं. सच्चा और अच्छा काम करने वाले को बुराई ही मिलती है. श्रीमान जी धन्यवाद्.  नमस्कार.

Ravinder kumar के द्वारा
October 11, 2012

आदरणीय प्रदीप जी, सादर नमस्कार. जीवन मूल्य बदल गए हैं. सच्चा और अच्छा काम करने वाले को बुराई ही मिलती है. श्रीमान जी धन्यवाद्. नमस्कार.

yogi sarswat के द्वारा
October 12, 2012

पिता ने उदासी से सर हिलाया और बाहर का रुख किया. बेटे ने जीवन की पाठशाला में एक सबक सीख लिया था के ईमानदार आदमी गंदा और कुत्ता होता है. जितनी तारीफ करी जाये उतनी ही कम ! बहुत कम शब्दों में आपने बहुत सटीक बात कह दी , रविन्द्र जी !

    Ravinder kumar के द्वारा
    October 18, 2012

    योगी जी, नमस्कार. जैसा देखा वैसा लिखा. मन आहत हुआ. प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्. नमस्ते जी.

Manisha Singh Raghav के द्वारा
December 19, 2012

रविन्द्र जी आपकी “कुत्ता आदमी लघु कथा बहुत अच्छी लगी । सच पूछो तो राजनीति लेखों के बीच ये लघु कथाएं कहीं ज्यादा दिल को छूती हुई प्रतीत होती हैं । अच्छी लघु कथाएँ वही लेखक लिख सकता है जिसकी जिन्दगी की तरफ पारखी निगाह हो ।

    Ravinder kumar के द्वारा
    December 22, 2012

    मनीषा जी, नमस्कार. उत्साहित करने वाली प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद्.


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