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माँ

Posted On: 8 May, 2013 Others में

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hindi-quotes-on-mother-i18
जब मैं कोमल था
फूल की तरह
जब हवा का एक झोंका भी
मुझे आहत करने के लिए काफी था
उस समय
मेरी माँ का झीना सा आंचल
बन जाता था मेरे लिए अभेद कवच.

जब मैं रोग ग्रस्त हो
सो न पाता था रात भर
तब मेरी माँ की गोद
उसके मुख से निकली लोरी
हर लेती थी
मेरी समस्त पीड़ाओं को.

जब पिता की डांट
उदास करती थी मन को
तब मेरी माँ का
प्यार भरा स्पर्श पा
मैं चहक उठता था

जिसकी हर प्रार्थना
और कामना
घूमती थी मेरे इर्द-गिर्द
आज उसी माँ की
उदास निगाहें
पूछती हैं मुझसे
क्या मेरे इस जर्जर और
झुके हुए शरीर का
सहारा बन पाओगे
और मैं अपनी वृद्ध
परन्तु समर्थ माँ का
सार्थक सहारा बनने के
प्रयास में लग जाता हूँ.

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15 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

nishamittal के द्वारा
May 9, 2013

बहुत सुन्दर भाव और रचना.काश सभी संतान अपने मातापिता का सहारा बन पाते.

    Ravinder kumar के द्वारा
    May 14, 2013

    आदरणीया निशा जी, सादर नमस्कार. आपने बिल्कुल सही सोचा के हर बच्चा अपने माता पिता का सहारा बन पाता. आपने अपने अमूल्य विचार प्रकट किये, आपका धन्यवाद्.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
May 9, 2013

आज उसी माँ की उदास निगाहें पूछती हैं मुझसे क्या मेरे इस जर्जर और झुके हुए शरीर का सहारा बन पाओगे हजारो माओं के दिल में बसा प्रश्न बधाई आदरणीय रविन्द्र जी सादर

    Ravinder kumar के द्वारा
    May 14, 2013

    आदरणीय प्रदीप जी, सादर नमस्कार. आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए अनमोल है. आपने समय निकाला, धन्यवाद्.

Rajesh Kumar Srivastav के द्वारा
May 9, 2013

बहुत सुन्दर रचना / मेरी एक माँ पर रचना है / प्रतिक्रिया चाहूँगा / http://rajeshkumarsrivastav.jagranjunction.com/2013/05/09/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%81-%E0%A4%A4%E0%A5%81%E0%A4%9D%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%8F%E0%A4%95-%E0%A4%B2%E0%A4%98%E0%A5%81-%E0%A4%95%E0%A4%A5%E0%A4%BE/

    Ravinder kumar के द्वारा
    May 14, 2013

    राजेश जी, सादर नमस्कार. प्रतिक्रिया के लिए आपका धन्यवाद्. मैं आपके ब्लॉग पर अवश्य ही आऊँगा.

omdikshit के द्वारा
May 10, 2013

रविंदर जी, नमस्कार. सार्थक प्रयास.

    Ravinder kumar के द्वारा
    May 14, 2013

    आदरणीय ओम जी, नमस्कार. आपने समय निकाला, प्रतिक्रिया दी. धन्यवाद्.

alkargupta1 के द्वारा
May 11, 2013

“आज उसी माँ की उदास निगाहें पूछती हैं मुझसे क्या मेरे इस जर्जर और झुके हुए शरीर का सहारा बन पाओगे और मैं अपनी वृद्ध परन्तु समर्थ माँ का सार्थक सहारा बनने के प्रयास में लग जाता हूँ.” बहुत ही सुन्दर अर्थपूर्ण भावाभिव्यक्ति रवीन्द्र जी

    Ravinder kumar के द्वारा
    May 14, 2013

    आदरणीय अलका जी, सादर नमस्कार. जब तक माँ युवा होती है तो उसके प्रति स्नेह सब दर्शाते हैं. वास्तविक स्नेह और सम्मान की परख तो माँ के वृद्ध हो जाने पर ही होती है. तब माँ बहुतों को बोझ लगती है. आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए अनमोल है. आपका बहुत -२ धन्यवाद्.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
August 20, 2013

प्रिय रविन्द्र जी ,,बहुत सुन्दर ..भाव पूर्ण रचना …. माँ की महिमा अपरम्पार है … हम सब का दायित्व अंत तक बनता है उसे दिल से लगा के पूजें और हर संभव प्रेम करें आज उसी माँ की उदास निगाहें पूछती हैं मुझसे क्या मेरे इस जर्जर और झुके हुए शरीर का सहारा बन पाओगे भ्रमर ५

    Ravinder kumar के द्वारा
    September 5, 2013

    भ्रमर जी , सादर नमस्कार. आपने बिल्कुल ठीक कहा के माँ की महिमा अपरम्पार है. उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद्. नमस्कार.

rajanidurgesh के द्वारा
September 5, 2013

रवीन्द्रजी खुशनसीब हैं वह मान जिनका पुत्र आप जैसा है. अच्छी रचना है.

    Ravinder kumar के द्वारा
    September 20, 2013

    दुर्गेश जी, सादर नमस्कार. उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद्.

rajanidurgesh के द्वारा
September 5, 2013

रवीन्द्रजी खुशनसीब हैं वह माँ जिनका पुत्र आप जैसा है. अच्छी रचना है.


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